प्रयागराज/ सुविख्यात समाज सेवक व भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र,क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविंदर सिंह ने प्रयागराज में विभिन्न समूह के बीच चौपाल लगाकर क्षेत्र में भ्रमण करते हुए "एक दिया बेटी के नाम" से जलाएं और यह प्राण ले की अपने आसपास कन्या भ्रूण हत्या नहीं होने देंगेl
सुविख्यात समाजसेवक सरदार पतविंदर सिंह ने आगे कहा कि दिवाली त्योहार के दिन ही सिख धर्म के अनुयायी ‘बंदी छोड़ दिवस’ के नाम से त्यौहार मनाते हैं। इस त्यौहार को मनाने के पीछे का इतिहास बड़ा रोचक है। दीपावली हिंदू और सिख भाईचारे का सांझा त्यौहार है। सिख धर्म में दीपावली के पर्व को ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिवाली के अवसर पर सिख धर्म में ‘बंदी छोड़ दिवस’का महत्व क्या है और इसे धूमधाम से मनाया जाता है।
परमजीत सिंह बग्गा ने कहा कि इतिहासकारों के मुताबिक मुगलों ने जब मध्य प्रदेश के ग्वालियर के किले को अपने कब्जे में लिया तो इसे जेल में तबदील कर दिया। इस किले में मुगल सल्तनत के लिए खतरा माने जाने वाले लोगों को कैद करके रखा जाता था। बादशाह जहांगीर ने यहां 52 हिन्दु राजाओं को कैद कर रखा था सिख धर्म के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए बादशाह जहांगीर ने सिखों के छठवें गुरू हरगोविंद साहिब जी को बंदी बना लिया। उसने गुरू हरगोविंद साहिब जी को ग्वालियर के किले में कैद कर दिया
लेकिन संयोग से जब जहांगीर ने गुरू हरगोविंद साहिब जी को कैद किया,वह बहुत बीमार पड़ गया। काफी इलाज के बाद भी वह ठीक नहीं हो रहा था। तब बादशाह के काजी ने उसे सलाह दिया कि वह इसलिए बीमार पड़ गया है क्योंकि उसने एक सच्चे गुरु को कैद कर लिया है।अगर वह स्वस्थ होना चाहता है तो उसे गुरु हरगोविंद सिंह को तुरंत छोड़ देना चाहिए। कहते हैं कि अपने काजी की सलाह पर काम करते हुए जहांगीर ने तुरंत गुरु को छोड़ने का आदेश जारी कर दिया। लेकिन गुरु हरगोविंद सिंह जी ने अकेले रिहा होने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे जेल से बाहर तभी जायेंगे जब उनके साथ कैद सभी 52 हिन्दू राजाओं को भी रिहा किया जायेगा। गुरू जी का हठ देखते हुए उसे सभी राजाओं को छोड़ने का आदेश जारी करना पड़ा। लेकिन यह आदेश जारी करते समय भी जहांगीर ने एक शर्त रख दी। उसकी शर्त थी कि कैद से गुरू जी के साथ सिर्फ वही राजा बाहर जा सकेंगे जो सीधे गुरू जी का कोई स्पर्श या कपड़ा पकड़े हुए होंगे।
उसकी सोच थी कि एक साथ ज्यादा राजा गुरू जी को छू नहीं पायेंगे और इस तरह बहुत से राजा उसकी कैद में ही रह जायेंगे। जहांगीर की चालाकी देखते हुए गुरू जी ने एक विशेष कुरता सिलवाया जिसमें 52 कलियां बनी हुई थीं। इस तरह एक-एक कली को पकड़े हुए सभी 52 राजा जहांगीर की कैद से आजाद हो गये।
इसी घटना की याद में "वहां गुरुद्वारा बनाया गया जिसे "गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ साहिब" नाम दिया गया। सिख धर्म में दीपावली के पर्व पर तब से ही ‘बंदी छोड़ दिवस’ मनाया जाता है।जहांगीर की कैद से आज़ाद होने के बाद जब गुरू हरगोविंद सिंह जी वापस अमृतसर पहुंचे तब पूरे अमृतसर में दीप जलाकर गुरू जी का स्वागत किया गया।
गुरु इतिहास को बताने वालों में सरदार पतविंदर सिंह,परमजीत सिंह बग्गा,कुलदीप सिंह खालसा, मनु चावला,जसविंदर सिंह जग्गी, कमल सिंह,हरमनजी सिंह सहित कई सामाजिक,राजनीतिक, साहित्यकार उपस्थित रहेl