नैनी, प्रयागराज। नैनी की एडीए कॉलोनी क्षेत्र में नाबालिग स्कूली छात्रों द्वारा बिना हेलमेट और बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बुलेट जैसी भारी मोटरसाइकिल चलाने का मामला गंभीर चिंता का विषय है। लगभग 12 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों का इस तरह सड़कों पर दोपहिया वाहन चलाना उनकी अपनी सुरक्षा के साथ-साथ अन्य राहगीरों के जीवन के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी कम उम्र के बच्चों के हाथों में मोटरसाइकिल की चाबी कौन सौंप रहा है? क्या अभिभावकों की यह जिम्मेदारी नहीं है कि वे अपने बच्चों को यातायात नियमों का पालन करना सिखाएं और उन्हें निर्धारित उम्र से पहले वाहन चलाने से रोकें?
दुर्घटना के बाद आरोप-प्रत्यारोप क्यों?
अक्सर सड़क दुर्घटना होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन दुर्घटना से पहले बरती जाने वाली लापरवाही पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए। यदि अभिभावक स्वयं नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति देते हैं, तो उनकी जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस और यातायात विभाग की कार्रवाई के साथ-साथ अभिभावकों की सतर्कता भी बेहद जरूरी है।
नियमों का पालन जरूरी
मोटर वाहन अधिनियम के तहत सामान्य मोटरसाइकिल चलाने के लिए निर्धारित आयु और वैध ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य हैं। 12 से 14 वर्ष के बच्चे सामान्य बुलेट मोटरसाइकिल चलाने के लिए कानूनी रूप से पात्र नहीं हैं। नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में वाहन स्वामी या अभिभावक पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन, यातायात पुलिस, विद्यालयों और अभिभावकों को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। विद्यालयों के आसपास और कॉलोनियों की सड़कों पर नियमित जागरूकता एवं जांच अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि किसी अनहोनी से पहले ही प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
सवाल यही है—क्या हम किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?* बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। समय रहते सावधानी बरती जाए, ताकि किसी परिवार को लापरवाही की भारी कीमत न चुकानी पड़े।
अपील: नाबालिग बच्चों को मोटरसाइकिल चलाने न दें। हेलमेट, यातायात नियमों और सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूकता को अपनी प्राथमिकता बनाएं।