नई दिल्ली।
दक्षिण भारत की एक डॉक्टर ने उत्तर प्रदेश की लोकप्रिय बोली अवधी के प्रति अपना गहरा लगाव जाहिर किया है। गोंडा मेडिकल सेंटर में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत डॉ. अनीता पुण्योदय मिश्रा का यह प्यार अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए उनके एक वीडियो में उन्होंने बताया कि कैसे शादी के बाद हिंदी सीखने वाली यह डॉक्टर अवधी को अपनी पसंदीदा भाषा मानती हैं।
डॉ. मिश्रा ने वीडियो में साफ कहा, “आप सभी जानते हैं कि मैं दक्षिण भारतीय हूं और मैंने शादी के बाद हिंदी बोलना सीखा। मेरी पसंदीदा भाषा अवधी है। जब कोई मुझसे अवधी में बात करता है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है।” उन्होंने आगे बताया कि मरीजों को अवधी में अपनी तकलीफें बताते हुए सुनना उन्हें बेहद सुखद लगता है। “जब मरीज मुझे अवधी में अपनी तकलीफें बताते हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है। ऐसा लगता है जैसे कोई मुझे कविता सुना रहा हो,” उन्होंने कहा।
“अवधी सीखना जीवन भर का सफर है”
डॉ. मिश्रा ने अपनी शुरुआती मुश्किलों का भी जिक्र किया। उन्होंने याद किया कि एक मरीज से पूरी तरह अवधी में बातचीत के दौरान वे कुछ देर के लिए फंस गई थीं। मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा, “मैं इसे समझ सकती हूं, लेकिन आज मरीज मुझसे अवधी में बात कर रहा था। तब मैं फंस गई। मैं उसे फिर से समझ नहीं पाई।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि अवधी कोई ऐसा कोर्स नहीं है जिसे एक दिन में पूरा कर लिया जाए। “अवधी सीखना जीवन भर का सफर है,” डॉ. मिश्रा का कहना है। वीडियो के अंत में उन्होंने उस भाषा और उस जगह के प्रति अपना प्यार व्यक्त करते हुए कहा, “जय अवधी! जय गोंडा!
गोंडा में नई जिंदगी, नई भाषा का प्यार
मूल रूप से दक्षिण भारत की रहने वाली डॉ. अनीता पुण्योदय मिश्रा अब उत्तर प्रदेश के गोंडा को अपना घर मानती हैं। अनुभवी प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में वे गोंडा मेडिकल सेंटर में प्रैक्टिस और सर्जरी करती हैं। स्थानीय भाषा से जुड़ाव ने न सिर्फ उनके पेशेवर जीवन को आसान बनाया है, बल्कि मरीजों के साथ उनके रिश्ते को भी और गहरा कर दिया है।
सोशल मीडिया पर उनका यह वीडियो काफी पसंद किया जा रहा है। लोग डॉक्टर के इस सकारात्मक रवैये और स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान को सराह रहे हैं। कई यूजर्स ने टिप्पणियों में लिखा कि भाषा की दीवारों को तोड़कर मरीजों से इस तरह जुड़ना वाकई प्रेरणादायक है।
डॉ. मिश्रा का यह अनुभव याद दिलाता है कि भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कृति का पुल भी हो सकती है। दक्षिण भारत से आई एक डॉक्टर का अवधी के प्रति यह प्यार आज उत्तर प्रदेश की लोक भाषा को नई पहचान दे रहा है।