वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ के साथ बैठक की। बैठक में एआई की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गूगल, एंथ्रोपिक, मेटा, ओपनएआई, एक्स-एआई और एनवीडिया के सीईओ ने एक समझौते पर साइन किए। इस दौरान ट्रम्प ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस (एसआई) करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए। उन्होंने कहा कि एआई को आर्टिफिशियल यानी बनावटी कहना ठीक नहीं है।
उनके मुताबिक, यह इंटरनेट से भी बड़ी तकनीक है। ट्रम्प ने कहा कि एआई की दौड़ अब अमेरिका और चीन के बीच है और फिलहाल अमेरिका इस मुकाबले में आगे चल रहा है। उन्होंने पिछले हफ्ते यूएन महासभा में पहली बार एआई को सुपर इंटेलिजेंस (एसआई) कहा था। समझौते में कंपनियों ने 4 बातें मानने पर सहमति दी:-1. अपने एआई सिस्टम की खुद जांच करेंगी: कंपनियां खुद जांचेंगी कि उनके एआई मॉडल सुरक्षा के तय नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। 2. अलग टीम निगरानी करेगी: कंपनियां एक टीम बनाएंगी, जो एआई सिस्टम की निगरानी करेगी और यह देखेगी कि कहीं कोई खतरा या गड़बड़ी तो नहीं है। 3. बाहर के विशेषज्ञ भी जांच करेंगे: कंपनियां अपने एआई मॉडल की जांच बाहरी विशेषज्ञों या किसी स्वतंत्र संस्था से भी कराएंगी। 4. कंपनी का बोर्ड भी नजर रखेगा: कंपनियों के बोर्ड की एक स्वतंत्र समिति इन जांच रिपोर्टों को देखेगी। अगर कोई समस्या सामने आती है तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी भी होगी। ट्रम्प ने टेक कंपनियों से कहा- डेटा सेंटर बनाने में स्थानीय लोगों को साथ लें
बैठक में एआई के लिए जरूरी डेटा सेंटर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी चर्चा हुई। ट्रम्प ने कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, टेक कंपनियों को वहां की स्थानीय कम्युनिटी के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि कंपनियों को इन इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद करनी चाहिए। इसमें स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी स्थानीय जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना भी शामिल हो सकता है। ट्रम्प के मुताबिक, डेटा सेंटर बनाने से पहले कंपनियों को स्थानीय समुदाय के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि इन प्रोजेक्ट्स का फायदा वहां रहने वाले लोगों को भी मिल सके। एआई के लिए डेटा सेंटर इतने जरूरी क्यों हैं? हम जिस एआई से सवाल पूछते हैं, उसके पीछे हजारों-लाखों शक्तिशाली कंप्यूटर काम करते हैं। ये बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। इसलिए एआई का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ेगी। जुकरबर्ग बोले- लोगों को एआई पर भरोसा होना जरूरी:- मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि व्हाइट हाउस के साथ हुए समझौते का मकसद लोगों का भरोसा बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी लोगों और ग्राहकों को भरोसा होना चाहिए कि एआई तकनीक उसी तरह काम करेगी, जिस तरह इसे बनाया गया है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने कहा कि सभी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा, ताकि इस तकनीक का विकास सुरक्षित तरीके से हो।
अमेरिका-चीन की एआई रेस में 4 मोर्चे पर मुकाबला:-1. चिप्स: एआई का दिमाग एआई को चलाने के लिए बहुत ताकतवर चिप्स चाहिए। जिसके पास बेहतर और ज्यादा चिप्स होंगे, वह बड़े और तेज एआई सिस्टम बना सकेगा। 2. डेटा सेंटर: जहां एआई चलता है एआई को चलाने वाले हजारों कंप्यूटर बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। एआई का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ऐसे डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ रही है। 3. बिजली: एआई को चलाने के लिए ईंधन डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली खाते हैं। इसलिए एआई की रेस में सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, पर्याप्त और लगातार बिजली मिलना भी जरूरी है। 4. एआई मॉडल: किसका एआई ज्यादा काम का? आखिर में मुकाबला इस बात का भी है कि कौन ज्यादा तेज, समझदार और मुश्किल काम करने वाला एआई मॉडल बना सकता है।