सोनभद्र | कोन थाना क्षेत्र
सोनभद्र के कोन थाना क्षेत्र में नितेश तिवारी उर्फ बाटा पंडित की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के लगभग 36 घंटे बीत जाने के बाद भी, परिजनों के अनुसार, न तो मामले में ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने आई है और न ही घटना की गुत्थी सुलझ सकी है। आखिर बाटा पंडित की मौत के पीछे की सच्चाई क्या है? पुलिस अब तक किसी निष्कर्ष पर क्यों नहीं पहुंच सकी? ये सवाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
धारदार हथियार से हमले का आरोप, सिर पर तीन वार की बात
परिजनों के अनुसार, नितेश तिवारी उर्फ बाटा पंडित पर परसों शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसमें उनकी मौत हो गई। परिवार का दावा है कि मृतक के सिर पर तीन वार के निशान थे। परिजनों का कहना है कि घटना को दुर्घटना मानने के बजाय चोटों की प्रकृति, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पिता ने दो आरोपियों के नाम दिए, फिर भी कार्रवाई पर सवाल
मृतक के पिता ललित तिवारी का कहना है कि उन्होंने लिखित शिकायत में दो लोगों के नाम दिए हैं और अपना बयान भी दर्ज कराया है। इसके बावजूद, उनके अनुसार, अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। परिवार का आरोप है कि पुलिस द्वारा पहले पोस्टमार्टम कराने और उसके बाद मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी उन्हें न्याय की दिशा में ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
क्या दुर्घटना की तहरीर देने का बनाया गया दबाव?
पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि क्षेत्राधिकारी (सीओ) की ओर से दुर्घटना का मामला लिखवाने के लिए बार-बार दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। यदि ऐसा हुआ है, तो यह गंभीर विषय है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पीड़ित परिवार की शिकायत को नियमानुसार दर्ज करना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
पुरानी रंजिश और धमकियों की शिकायत, पुलिस की भूमिका पर सवाल
परिजनों का आरोप है कि नितेश तिवारी और नामजद व्यक्तियों के बीच पहले भी विवाद होते रहे थे। उनका दावा है कि कई बार डायल 112 को सूचना दी गई थी और धमकियों की शिकायत भी की गई थी। परिवार का सवाल है कि यदि पहले से विवाद की जानकारी थी, तो समय रहते उचित कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सभी आरोपों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं और किन लोगों की क्या भूमिका रही।
राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक लापरवाही? निष्पक्ष जांच की मांग
मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पीड़ित पक्ष को आशंका है कि कहीं बाहरी दबाव के कारण कार्रवाई प्रभावित तो नहीं हो रही। हालांकि, किसी राजनीतिक दबाव या आर्थिक लेन-देन के आरोप की पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस इन आशंकाओं को दूर करने के लिए पारदर्शी जांच करे और अपनी कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करे।
क्या न्याय मांगना भी अब संघर्ष बन गया है?
नितेश तिवारी की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों और स्थानीय लोगों के मन में कई सवाल हैं। क्या एक आम नागरिक की जान की कीमत इतनी कम है कि परिवार को न्याय के लिए थाने के चक्कर लगाने पड़ें? क्या पहले की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हुई थी? और सबसे बड़ा सवाल—मौत की असली वजह सामने कब आएगी?
यह मामला किसी जाति या बिरादरी की राजनीति का नहीं, बल्कि एक नागरिक की मौत और उसके परिवार को न्याय दिलाने का है। कानून की नजर में हर व्यक्ति समान है। यदि मृतक के साथ अन्याय हुआ है, तो दोषियों को साक्ष्यों के आधार पर सजा मिलनी चाहिए; और यदि किसी निर्दोष पर आरोप लगाया गया है, तो निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए।
प्रशासन से सीधे सवाल
- पीड़ित परिवार की लिखित शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
- क्या नामजद व्यक्तियों से पूछताछ की गई है?
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों और मौत के कारण के संबंध में क्या निष्कर्ष सामने आए?
- घटना से पहले हुए विवादों और डायल 112 पर की गई कथित शिकायतों की जांच हुई या नहीं?
- परिवार को जांच की प्रगति की जानकारी कब दी जाएगी?
अब निगाहें प्रशासन पर
नितेश तिवारी उर्फ बाटा पंडित की मौत का मामला अब केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल बन गया है। पीड़ित परिवार की मांग है कि मामले में नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की जाए, साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए और दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
सोनभद्र प्रशासन से सवाल है—आखिर बाटा पंडित की मौत का सच कब सामने आएगा और पीड़ित परिवार को न्याय कब मिलेगा?