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अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी के चीफ की रूस में अचानक सीक्रेट लैंडिंग, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से पहुंचे

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ADHUNIK NEWS ,26 August 2026, (Update 27 October 2026, 2:12 PM UTC)
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मॉस्को। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ मॉस्को पहुंचे हैं। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, वह अमेरिकी वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर से मॉस्को गए और वहां अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। यह सीआईए चीफ बनने के बाद रैटक्लिफ की रूस की पहली यात्रा है

मॉस्को। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ मॉस्को पहुंचे हैं। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, वह अमेरिकी वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर से मॉस्को गए और वहां अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। यह सीआईए चीफ बनने के बाद रैटक्लिफ की रूस की पहली यात्रा है। रैटक्लिफ के रूस दौरे की पहले कोई घोषणा नहीं की गई थी। अमेरिकी सैन्य विमान के मॉस्को पहुंचने के बाद उनकी यात्रा की खबर सामने आई। इससे पहले रूसी अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें सी-17 ग्लोबमास्टर की मॉस्को यात्रा की जानकारी नहीं है। अमेरिकी सरकार ने भी अभी इस दौरे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

अमेरिका से लातविया और फिर मॉस्को पहुंचा सी17:-  फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना का सी-17 पहले अमेरिका से लातविया की राजधानी रीगा पहुंचा। इसके बाद विमान मंगलवार सुबह करीब 9 बजे मॉस्को के लिए रवाना हुआ और व्नुकोवो एयरपोर्ट पर उतरा। यह विमान आरसीएच4555 कॉल साइन से उड़ रहा था। इसकी उड़ान की एक खास बात यह थी कि विमान रूस के हवाई क्षेत्र से होकर मॉस्को पहुंचा। अमेरिकी सैन्य विमान के इस रास्ते से उड़ान भरने के लिए रूसी अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होती है। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें इस विमान की मॉस्को यात्रा की जानकारी नहीं थी।

रूस से बातचीत अटकी, इसी बीच मॉस्को पहुंचे रैटक्लिफ;- रिपोर्ट के मुताबिक, रैटक्लिफ मॉस्को में बैठकों के लिए गए हैं। हालांकि, वह किन रूसी अधिकारियों से मिल रहे हैं और किन मुद्दों पर बातचीत हो रही है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। उनका दौरा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिशें फिलहाल आगे नहीं बढ़ रही हैं। दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है। ऐसे में सीआईए चीफ का सीधे मॉस्को पहुंचना और रूसी अधिकारियों से बैठक करना अहम माना जा रहा है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इन बैठकों में यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई बातचीत हो रही है या नहीं। इससे पहले मॉस्को जाने वाले आखिरी ज्ञात सीआईए डायरेक्टर विलियम बर्न्स थे।

उन्होंने नवंबर 2021 में रूस का दौरा किया था। इसके कुछ महीने बाद ही रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य हमला शुरू किया था। रैटक्लिफ के मॉस्को पहुंचने से पहले क्या हुआ? रैटक्लिफ की यात्रा की पुष्टि से पहले सी-17 की मॉस्को उड़ान ही सबसे बड़ा सवाल बनी हुई थी। विमान 23 अगस्त को वॉशिंगटन डीसी के पास मौजूद जॉइंट बेस एंड्रयूज से लातविया पहुंचा था। यह वही अमेरिकी सैन्य अड्डा है जहां राष्ट्रपति के विमान रहते हैं। इनमें एयर फोर्स वन भी शामिल है। इसके बाद विमान रीगा से मॉस्को पहुंचा। उस समय यह पता नहीं था कि विमान को रूस की राजधानी क्यों भेजा गया है और उसमें कौन सवार है। अब अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट से पता चला है कि सीआईए चीफ जॉन रैटक्लिफ इसी विमान से मॉस्को पहुंचे थे।

सी-17 ग्लोबमास्टर: टैंक से सैनिकों तक इस्तेमाल- सी17-ग्लोबमास्टर अमेरिकी वायुसेना का भारी सैन्य परिवहन विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, टैंकों, सैन्य वाहनों और भारी सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल हवा से सामान गिराने, घायल सैनिकों को निकालने और आपदा के समय राहत सामग्री पहुंचाने में भी किया जाता है। यह लड़ाकू विमान या बॉम्बर नहीं है। इसकी रफ्तार करीब 834 किमी/घंटा है और यह करीब 3,500 फीट लंबी रनवे से भी उड़ान भर सकता है। इसकी एक खासियत यह भी है कि यह पीछे की ओर चल सकता है। भारत के पास भी 11 सी-17 ग्लोबमास्टर-भारत के पास सी-17 ग्लोबमास्टर के 11 प्लेन हैं। भारत ने 2011 में अमेरिका से 10 सी-17 ग्लोबमास्टर III खरीदने का करीब 4.1 अरब डॉलर का सौदा किया था। पहला प्लेन जून 2013 में भारत पहुंचा और बाकी 9 विमानों की डिलीवरी 2014 तक पूरी हो गई। इसके बाद भारत को 2019 में 11वां सी-17 मिला। खास बात यह है कि यह प्लेन पहले से बना हुआ था और बोइंग के पास बिना किसी खरीदार के रखा था। 

भारत ने इसे अपनी जरूरत के मुताबिक तैयार करवाकर हासिल किया। भारत के सभी 11 सी-17 ग्लोबमास्टर भारतीय वायुसेना की 81 स्क्वाड्रन ‘स्काई लॉर्ड्स’ का हिस्सा हैं। इस यूनिट का बेस हिंडन एयरबेस में है। यमन से लेकर लद्दाख तक दिखा चुका है ताकत-यमन, 2015: युद्ध के बीच सी-17 ने 2,096 लोगों को भारत पहुंचाने में मदद की। सूडान, 2023: गृहयुद्ध के बीच करीब 24 घंटे चले रेस्क्यू मिशन में इसका इस्तेमाल हुआ। एक मिशन में 192 लोगों को निकाला गया। चीन सीमा के पास: 2018 में सी-17 ने अरुणाचल प्रदेश की टूटिंग एयरस्ट्रिप पर लैंड किया। यह जगह चीन की सीमा से करीब 30 किलोमीटर दूर है। प्लेन वहां करीब 18 टन सामान लेकर पहुंचा था। लद्दाख: ऊंचाई वाले इलाकों में सैनिकों और भारी सैन्य सामान को तेजी से पहुंचाने में सी-17 की अहम भूमिका रही है।

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