वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चा तेल भंडार है। अनुमान के मुताबिक यह करीब 300-303 अरब बैरल है, जो वैश्विक भंडार का लगभग 17-20 प्रतिशत बैठता है। फिर भी देश लंबे समय से आर्थिक संकट, महंगाई और गरीबी से जूझता रहा।
क्यों तेल होने के बावजूद गरीब रहा वेनेजुएला?
देश की सरकारी तेल कंपनी PDVSA कमजोर पड़ गई। तेल उद्योग में निवेश घटा, उत्पादन लगातार गिरा और बुनियादी ढांचा जर्जर हो गया। अमेरिकी प्रतिबंधों ने भी तेल निर्यात और कारोबार को भारी नुकसान पहुंचाया। नतीजा यह हुआ कि जमीन के नीचे तेल बहुत होने के बावजूद उसे निकालने, रिफाइन करने और बेचने की क्षमता कमजोर हो गई। कई साल तक आर्थिक कुप्रबंधन और राजनीतिक अस्थिरता ने आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डाला। वर्तमान में वेनेजुएला का तेल उत्पादन करीब 1.1-1.25 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आसपास है, जो उसके भंडार की तुलना में बहुत कम है।
अमेरिका के साथ ‘इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला के साथ एक बड़े समझौते का ऐलान किया है। ट्रंप के अनुसार, इस डील के तहत अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा प्रमाणित तेल भंडार पर बहुमत नियंत्रण मिल गया है। यह अमेरिकी करदाताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले बिना हुआ है।
वेनेजुएला की अंतरिम सरकार के अनुसार, समझौते में 17 रणनीतिक तेल क्षेत्रों का विकास शामिल है। इससे करीब 100 अरब डॉलर का निजी निवेश आने और वेनेजुएला को 209 अरब डॉलर से ज्यादा का टैक्स राजस्व मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी कंपनियां इन क्षेत्रों को विकसित करेंगी, जिससे उत्पादन बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मदद मिल सकती है।
OPEC को चुनौती?
वेनेजुएला OPEC का संस्थापक सदस्य है। अब अमेरिका के साथ नजदीकी और संभावित उत्पादन वृद्धि के कारण वेनेजुएला OPEC छोड़ने पर भी विचार कर रहा है (अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है)। अगर उत्पादन बढ़ा और ज्यादा तेल बाजार में आया, तो कीमतों पर गिरावट का दबाव बन सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि:
- उत्पादन बढ़ाने में साल लग सकते हैं क्योंकि बुनियादी ढांचा जर्जर है।
- ईरान से जुड़े मुद्दे, OPEC के फैसले, वैश्विक मांग और दूसरे देशों का उत्पादन भी कीमतें तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
- तुरंत पेट्रोल-डीजल सस्ता हो जाएगा, ऐसा नहीं माना जा रहा।
यह डील वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और अमेरिका को भारी कच्चा तेल उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। साथ ही OPEC की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर रही है।