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इंडस्ट्री 5.0 और भविष्य का स्नातक: तकनीक के साथ मानवीय क्षमता का नया संतुलन

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ADHUNIK NEWS ,2 September 2026, (Update 23 September 2026, 6:27 AM UTC)
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कौशाकी सोंधी, Dean- डीन–प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट, महाराष्ट्र, व्यक्तित्व विकास, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, कॉरपोरेट प्रशिक्षक और विद्यार्थी मार्गदर्शक हैं। शिक्षा, कौशल विकास, करियर निर्माण और उद्योग–शिक्षा समन्वय के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखने वाली सोंधी ने विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय और कॉरपोरेट जगत तक विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाओं में कार्य किया है।

कौशाकी सोंधी, Dean- डीन–प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट, महाराष्ट्र, व्यक्तित्व विकास, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, कॉरपोरेट प्रशिक्षक और विद्यार्थी मार्गदर्शक हैं। शिक्षा, कौशल विकास, करियर निर्माण और उद्योग–शिक्षा समन्वय के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखने वाली सोंधी ने विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय और कॉरपोरेट जगत तक विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाओं में कार्य किया है। वे शारदा विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण एवं विकास विभाग की प्रमुख प्रशिक्षक, आईआईएमटी समूह के महाविद्यालयों में प्रमुख प्रशिक्षक, मंगलमय इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ग्रेटर नोएडा में प्राध्यापक एवं विद्यार्थी परामर्शदाता, होली पब्लिक स्कूल में प्रधानाचार्य तथा बॉम्बे पेपर मिल्स लिमिटेड, मुंबई में अधिगम एवं विकास प्रबंधक के रूप में कार्य कर चुकी हैं। वे नीति आयोग की ‘मेंटोर ऑफ चेंज’, सिम्बायोसिस सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन की मार्गदर्शक तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं संस्थानों की सलाहकार एवं मार्गदर्शक रही हैं। वे भारत विश्वविद्यालय, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज तथा भारत इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी सहित अनेक संस्थानों से शैक्षणिक एवं सलाहकार भूमिकाओं में जुड़ी रही हैं। साथ ही, वे अखिल भारतीय मानवाधिकार, स्वतंत्रता एवं सामाजिक न्याय परिषद की राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण उपाध्यक्ष तथा वूमेन इंडिया काउंसिल ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री से भी नेतृत्वकारी भूमिका में जुड़ी हैं।

कौशाकी सोंधी कहती हैं, “वर्ष 2026 का रोजगार बाजार विद्यार्थियों से केवल डिग्री नहीं, बल्कि अपनी उपयोगिता सिद्ध करने की क्षमता मांग रहा है। अब सवाल यह नहीं है कि विद्यार्थी ने क्या पढ़ा है, बल्कि यह है कि वह अपने ज्ञान का उपयोग वास्तविक समस्या को हल करने, तकनीक के साथ काम करने और संगठन के लिए मूल्य पैदा करने में कितना कर सकता है।”

आज रोजगार की दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, रोबोटिक्स, बड़े आंकड़े, क्लाउड तकनीक और डिजिटल कार्यप्रणालियां पारंपरिक नौकरियों और भूमिकाओं की प्रकृति बदल रही हैं। इसी बदलते परिदृश्य में इंडस्ट्री 5.0 की अवधारणा महत्वपूर्ण हो जाती है। सोंधी के अनुसार, इंडस्ट्री 5.0 केवल अधिक उन्नत तकनीक की कहानी नहीं है; यह **मनुष्य और मशीन के बीच बेहतर सहयोग की कहानी है। “मशीनें गति, गणना और स्वचालन दे सकती हैं, लेकिन रचनात्मक सोच, सहानुभूति, नेतृत्व, नैतिक निर्णय और मानवीय समझ को विकसित करना अभी भी शिक्षा की जिम्मेदारी है,” वे कहती हैं।

उनके अनुसार, इसका सीधा प्रभाव महाविद्यालयों की प्रशिक्षण और प्लेसमेंट व्यवस्था पर पड़ रहा है। 2026 में प्लेसमेंट की तैयारी अंतिम वर्ष से शुरू करना देर से शुरू करना है।विद्यार्थी के पहले वर्ष से ही उसकी रुचि, क्षमता और करियर लक्ष्य को पहचानकर कौशल विकास की दिशा तय करनी होगी। संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास, तार्किक क्षमता, समूह चर्चा, प्रस्तुतीकरण, साक्षात्कार, डिजिटल दक्षता और व्यावसायिक शिष्टाचार जैसी क्षमताओं को पाठ्यक्रम के समान ही महत्व देना होगा।

इंटर्नशिप को लेकर सोंधी का दृष्टिकोण स्पष्ट है—“इंटर्नशिप प्रमाण-पत्र नहीं, अनुभव की प्रयोगशाला होनी चाहिए।” उनके अनुसार, 2026 में इंजीनियरिंग, प्रबंधन, वाणिज्य, कंप्यूटर अनुप्रयोग, फार्मेसी, विज्ञान, मानविकी, डिजाइन और अन्य सभी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को वास्तविक उद्योग अनुभव की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को केवल उपस्थिति पूरी करने वाली इंटर्नशिप के बजाय लाइव प्रोजेक्ट, उद्योग आधारित समस्या, शोध कार्य, ग्राहक संवाद, आंकड़ों का विश्लेषण, क्षेत्रीय कार्य और परिणाम आधारित जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। ऐसी इंटर्नशिप विद्यार्थी को केवल नौकरी के लिए तैयार नहीं करती, बल्कि उसे पेशेवर दुनिया की वास्तविक अपेक्षाओं को समझने का अवसर देती है। कई मामलों में यही अनुभव पूर्व-नियुक्ति प्रस्ताव तक भी पहुंचा सकता है।

सोंधी आगे बताती हैं कि कैंपस प्लेसमेंट का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। कंपनियां अब केवल शैक्षणिक अंक और पारंपरिक साक्षात्कार के आधार पर उम्मीदवारों का चयन नहीं कर रहीं। ऑनलाइन मूल्यांकन, कौशल आधारित परीक्षण, परिस्थिति आधारित प्रश्न, समूह चर्चा, तकनीकी साक्षात्कार, व्यवहारिक मूल्यांकन और डिजिटल माध्यमों से भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल परीक्षा पास करने के बजाय स्वयं को बहुआयामी पेशेवर के रूप में प्रस्तुत करना सीखना होगा।

“हर स्ट्रीम के विद्यार्थी के लिए रोजगार की भाषा अलग हो सकती है, लेकिन रोजगार-योग्यता की बुनियादी भाषा लगभग समान है,” सोंधी कहती हैं। इंजीनियरिंग और कंप्यूटर से जुड़े विद्यार्थियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रोग्रामिंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड और आंकड़ा विश्लेषण जैसी तकनीकी दक्षताएं महत्वपूर्ण हैं। प्रबंधन विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक विश्लेषण, डिजिटल विपणन, वित्तीय समझ, नेतृत्व और निर्णय क्षमता आवश्यक हैं। वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए वित्तीय तकनीक, आंकड़ा विश्लेषण, डिजिटल लेखांकन और व्यावसायिक संचार उपयोगी हैं। फार्मेसी और विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए अनुसंधान, आंकड़ा-आधारित सोच, प्रयोगशाला कौशल और उद्योग संबंधी समझ महत्वपूर्ण होती जा रही है। वहीं मानविकी के विद्यार्थियों की संचार, शोध, रचनात्मकता, सामाजिक समझ और आलोचनात्मक चिंतन जैसी क्षमताएं डिजिटल युग में नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर सोंधी कहती हैं कि विद्यार्थियों को एआई से डरने के बजाय एआई के साथ काम करना सीखना चाहिए। एआई जीवन-वृत्त तैयार करने, जानकारी खोजने, विश्लेषण करने, प्रस्तुति बनाने और सीखने की प्रक्रिया को आसान बना सकता है, लेकिन विद्यार्थी की मौलिक सोच और सत्यापन की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। “एआई का उपयोग करने वाला विद्यार्थी आगे बढ़ सकता है, लेकिन एआई पर पूरी तरह निर्भर विद्यार्थी अपनी निर्णय क्षमता खो सकता है। इसलिए तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल नैतिकता और आलोचनात्मक सोच अनिवार्य है,” वे स्पष्ट करती हैं।

उनके अनुसार, आने वाले समय में मानवीय कौशल का महत्व कम नहीं बल्कि अधिक होगा। रचनात्मकता, संवाद, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, नेतृत्व, सहयोग, समस्या समाधान, अनुकूलनशीलता और सीखने की इच्छा वे क्षमताएं हैं जो किसी विद्यार्थी को बदलती तकनीक के बीच भी प्रासंगिक बनाए रखेंगी। यही इंडस्ट्री 5.0 का मूल संदेश है—तकनीक को मानव क्षमता का विकल्प नहीं, बल्कि विस्तार बनाना।

सोंधी का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती **शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कम करना है। इसके लिए उद्योग विशेषज्ञों को कक्षा से जोड़ना, नियमित कौशल प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण इंटर्नशिप, वास्तविक परियोजनाएं, प्रमाणित कौशल कार्यक्रम, पूर्व-नियुक्ति प्रशिक्षण, करियर परामर्श और निरंतर उद्योग संवाद आवश्यक हैं। प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट विभाग को केवल कंपनियों को बुलाकर भर्ती कराने वाली इकाई के रूप में नहीं, बल्कि विद्यार्थी के संपूर्ण करियर विकास का रणनीतिक केंद्र बनाया जाना चाहिए।

“आज का विद्यार्थी केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि भविष्य का समस्या-समाधानकर्ता, नवोन्मेषक और जिम्मेदार पेशेवर है,” सोंधी कहती हैं। उनके अनुसार, कॉलेजों को विद्यार्थियों में तीन समानांतर क्षमताएं विकसित करनी होंगी—क्या जानना है, क्या करना है और कैसे बेहतर इंसान बनकर करना है।

इंडस्ट्री 5.0 के दौर में भविष्य का सफल स्नातक वही होगा जो तकनीक को समझता हो, लेकिन तकनीक से आगे सोच भी सकता हो; जो एआई का उपयोग कर सकता हो, लेकिन अपनी स्वतंत्र सोच भी रखता हो; जो अपने विषय में दक्ष हो, लेकिन दूसरे क्षेत्रों के साथ सहयोग भी कर सकता हो; और जो नौकरी खोजने के साथ-साथ नए अवसरों का निर्माण करने की क्षमता भी रखता हो।
 

कौशाकी सोंधी के शब्दों में, “भविष्य की शिक्षा का लक्ष्य केवल रोजगार प्राप्त करने वाले स्नातक तैयार करना नहीं होना चाहिए। हमारा लक्ष्य ऐसे ‘भविष्य-तैयार’ पेशेवर तैयार करना होना चाहिए, जो तकनीकी रूप से सक्षम, मानवीय रूप से संवेदनशील, नैतिक रूप से मजबूत और लगातार सीखने के लिए तैयार हों। यही इंडस्ट्री 5.0 के युग में शिक्षा, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट की वास्तविक सफलता होगी।”
मनुष्य और मशीन के बीच बेहतर सहयोग की कहानी है। “मशीनें गति, गणना और स्वचालन दे सकती हैं, लेकिन रचनात्मक सोच, सहानुभूति, नेतृत्व, नैतिक निर्णय और मानवीय समझ को विकसित करना अभी भी शिक्षा की जिम्मेदारी है,” वे कहती हैं।

उनके अनुसार, इसका सीधा प्रभाव महाविद्यालयों की प्रशिक्षण और प्लेसमेंट व्यवस्था पर पड़ रहा है। 2026 में प्लेसमेंट की तैयारी अंतिम वर्ष से शुरू करना देर से शुरू करना है। विद्यार्थी के पहले वर्ष से ही उसकी रुचि, क्षमता और करियर लक्ष्य को पहचानकर कौशल विकास की दिशा तय करनी होगी। संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास, तार्किक क्षमता, समूह चर्चा, प्रस्तुतीकरण, साक्षात्कार, डिजिटल दक्षता और व्यावसायिक शिष्टाचार जैसी क्षमताओं को पाठ्यक्रम के समान ही महत्व देना होगा।

इंटर्नशिप को लेकर सोंधी का दृष्टिकोण स्पष्ट है—“इंटर्नशिप प्रमाण-पत्र नहीं, अनुभव की प्रयोगशाला होनी चाहिए।” उनके अनुसार, 2026 में इंजीनियरिंग, प्रबंधन, वाणिज्य, कंप्यूटर अनुप्रयोग, फार्मेसी, विज्ञान, मानविकी, डिजाइन और अन्य सभी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को वास्तविक उद्योग अनुभव की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को केवल उपस्थिति पूरी करने वाली इंटर्नशिप के बजाय लाइव प्रोजेक्ट, उद्योग आधारित समस्या, शोध कार्य, ग्राहक संवाद, आंकड़ों का विश्लेषण, क्षेत्रीय कार्य और परिणाम आधारित जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। ऐसी इंटर्नशिप विद्यार्थी को केवल नौकरी के लिए तैयार नहीं करती, बल्कि उसे पेशेवर दुनिया की वास्तविक अपेक्षाओं को समझने का अवसर देती है। कई मामलों में यही अनुभव पूर्व-नियुक्ति प्रस्ताव तक भी पहुंचा सकता है।

सोंधी आगे बताती हैं कि कैंपस प्लेसमेंट का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। कंपनियां अब केवल शैक्षणिक अंक और पारंपरिक साक्षात्कार के आधार पर उम्मीदवारों का चयन नहीं कर रहीं। ऑनलाइन मूल्यांकन, कौशल आधारित परीक्षण, परिस्थिति आधारित प्रश्न, समूह चर्चा, तकनीकी साक्षात्कार, व्यवहारिक मूल्यांकन और डिजिटल माध्यमों से भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल परीक्षा पास करने के बजाय स्वयं को बहुआयामी पेशेवर के रूप में प्रस्तुत करना सीखना होगा।

“हर स्ट्रीम के विद्यार्थी के लिए रोजगार की भाषा अलग हो सकती है, लेकिन रोजगार-योग्यता की बुनियादी भाषा लगभग समान है,” सोंधी कहती हैं। इंजीनियरिंग और कंप्यूटर से जुड़े विद्यार्थियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रोग्रामिंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड और आंकड़ा विश्लेषण जैसी तकनीकी दक्षताएं महत्वपूर्ण हैं। प्रबंधन विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक विश्लेषण, डिजिटल विपणन, वित्तीय समझ, नेतृत्व और निर्णय क्षमता आवश्यक हैं। वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए वित्तीय तकनीक, आंकड़ा विश्लेषण, डिजिटल लेखांकन और व्यावसायिक संचार उपयोगी हैं। फार्मेसी और विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए अनुसंधान, आंकड़ा-आधारित सोच, प्रयोगशाला कौशल और उद्योग संबंधी समझ महत्वपूर्ण होती जा रही है। वहीं मानविकी के विद्यार्थियों की संचार, शोध, रचनात्मकता, सामाजिक समझ और आलोचनात्मक चिंतन जैसी क्षमताएं डिजिटल युग में नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर सोंधी कहती हैं कि विद्यार्थियों को एआई से डरने के बजाय एआई के साथ काम करना सीखना चाहिए। एआई जीवन-वृत्त तैयार करने, जानकारी खोजने, विश्लेषण करने, प्रस्तुति बनाने और सीखने की प्रक्रिया को आसान बना सकता है, लेकिन विद्यार्थी की मौलिक सोच और सत्यापन की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। “एआई का उपयोग करने वाला विद्यार्थी आगे बढ़ सकता है, लेकिन एआई पर पूरी तरह निर्भर विद्यार्थी अपनी निर्णय क्षमता खो सकता है। इसलिए तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल नैतिकता और आलोचनात्मक सोच अनिवार्य है,” वे स्पष्ट करती हैं।

उनके अनुसार, आने वाले समय में मानवीय कौशल का महत्व कम नहीं बल्कि अधिक होगा। रचनात्मकता, संवाद, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, नेतृत्व, सहयोग, समस्या समाधान, अनुकूलनशीलता और सीखने की इच्छा वे क्षमताएं हैं जो किसी विद्यार्थी को बदलती तकनीक के बीच भी प्रासंगिक बनाए रखेंगी। यही इंडस्ट्री 5.0 का मूल संदेश है—तकनीक को मानव क्षमता का विकल्प नहीं, बल्कि विस्तार बनाना।

सोंधी का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कम करना है। इसके लिए उद्योग विशेषज्ञों को कक्षा से जोड़ना, नियमित कौशल प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण इंटर्नशिप, वास्तविक परियोजनाएं, प्रमाणित कौशल कार्यक्रम, पूर्व-नियुक्ति प्रशिक्षण, करियर परामर्श और निरंतर उद्योग संवाद आवश्यक हैं। प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट विभाग को केवल कंपनियों को बुलाकर भर्ती कराने वाली इकाई के रूप में नहीं, बल्कि **विद्यार्थी के संपूर्ण करियर विकास का रणनीतिक केंद्र बनाया जाना चाहिए।

“आज का विद्यार्थी केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि भविष्य का समस्या-समाधानकर्ता, नवोन्मेषक और जिम्मेदार पेशेवर है,”* सोंधी कहती हैं। उनके अनुसार, कॉलेजों को विद्यार्थियों में तीन समानांतर क्षमताएं विकसित करनी होंगी—*क्या जानना है, क्या करना है और कैसे बेहतर इंसान बनकर करना है।

इंडस्ट्री 5.0 के दौर में भविष्य का सफल स्नातक वही होगा जो तकनीक को समझता हो, लेकिन तकनीक से आगे सोच भी सकता हो; जो एआई का उपयोग कर सकता हो, लेकिन अपनी स्वतंत्र सोच भी रखता हो; जो अपने विषय में दक्ष हो, लेकिन दूसरे क्षेत्रों के साथ सहयोग भी कर सकता हो; और जो नौकरी खोजने के साथ-साथ नए अवसरों का निर्माण करने की क्षमता भी रखता हो।

कौशाकी सोंधी के शब्दों में, “भविष्य की शिक्षा का लक्ष्य केवल रोजगार प्राप्त करने वाले स्नातक तैयार करना नहीं होना चाहिए। हमारा लक्ष्य ऐसे ‘भविष्य-तैयार’ पेशेवर तैयार करना होना चाहिए, जो तकनीकी रूप से सक्षम, मानवीय रूप से संवेदनशील, नैतिक रूप से मजबूत और लगातार सीखने के लिए तैयार हों। यही इंडस्ट्री 5.0 के युग में शिक्षा, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट की वास्तविक सफलता होगी।”

 

 

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के एक अस्पताल में बुधवार को आग लगने से 15 नवजात बच्चों की मौत हो गई। हादसा पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) अस्पताल में स्त्री रोग वार्ड की नर्सरी में हुआ।

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