प्रयागराज/गाज़ियाबाद:
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गाजियाबाद के डुंडाहेडा वार्ड नं. 27 स्थित याचिकाकर्ता की दुकान तोड़े जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट के स्पष्ट स्थगन आदेश (Stay Order) के बावजूद कार्रवाई करने पर नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने नगर आयुक्त, नगर निगम गाज़ियाबाद और जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है।
इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से युवा अधिवक्ता विनय पाण्डेय, अंजनी कुमार शुक्ला और शिवेंद्र चौरसिया की टीम ने पैरवी की। विशेष रूप से, अधिवक्ता विनय पाण्डेय ने अदालत में मामले की कमान संभालते हुए प्रभावी और तर्कपूर्ण तथ्य रखे, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया।
मामले के मुख्य बिंदु:
स्टे के बावजूद तोड़फोड़: हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2026 को याचिकाकर्ता की दुकान (परिसर संख्या 673) के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद, आदेश की जानकारी होने पर भी अगले ही दिन (20 अगस्त को) दुकान गिरा दी गई, जिसे कोर्ट ने न्यायिक आदेशों की अवमानना और गंभीर उल्लंघन माना है।
पुनर्निर्माण खर्च की चेतावनी: कोर्ट ने नगर आयुक्त और डीएम को नोटिस देकर पूछा है कि क्यों न तोड़ी गई संपत्ति का पुनर्निर्माण उनके या उनके खर्चे पर संयुक्त रूप से कराया जाए।
संपत्ति अटैच करने के आदेश: मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन), गाज़ियाबाद को आदेशित किया है कि वह तुरंत विवादित स्थल पर कंटीले तार या मजबूत बाड़ (Fencing) लगवाकर बोर्ड चस्पा करें कि यह संपत्ति हाईकोर्ट के आदेश (दिनांक 21.08.2026) के तहत अटैच की गई है।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।