डॉ राजा पाठक
सोनभद्र, 26 अक्टूबर। राष्ट्रीय संचेतना समिति एवं गुप्तकाशी विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को नगर पालिका परिषद, सोनभद्र नगर के सभागार में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह एवं ‘ऋषि सम्मान’ अलंकरण कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। समारोह में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभागाध्यक्ष डॉ. शशांक शुक्ल को साहित्यिक एवं बौद्धिक योगदान के लिए ‘ऋषि सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजा पाठक रहे तथा अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार पं. पारस नाथ मिश्र ने की।
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. शशांक शुक्ल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण जैसे कालजयी महाकाव्य की रचना कर भारतीय साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को अमूल्य धरोहर प्रदान की। संस्कृत के प्रथम महाकाव्य रामायण की रचना के कारण ही महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त है। उनकी काव्य-साधना भारतीय जीवन-मूल्यों, मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं की अनुपम अभिव्यक्ति है।
मुख्य अतिथि डॉ. राजा पाठक ने महर्षि वाल्मीकि की तपस्या, साधना और अदम्य संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन आत्मानुशासन, धैर्य और साधना की पराकाष्ठा का प्रतीक है। वहीं, समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार पं. पारस नाथ मिश्र ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण सत्य, धर्म और सदाचार का शाश्वत संदेश देती है। उनका साहित्य मानवता को नैतिकता, कर्तव्यबोध और आदर्श जीवन-पथ पर चलने की प्रेरणा प्रदान करता है।
इस अवसर पर गुप्तकाशी विकास परिषद, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पं. आलोक कुमार चतुर्वेदी, राष्ट्रीय संचेतना समिति के निदेशक जगदीश पंथी, आशुतोष ‘मुन्ना’, अनूप मिश्रा, कौसल्या देवी, अनुपमा वाणी, डॉ. लखन राम जंगली, प्रेम मिश्रा, वीरेंद्र देव पाण्डेय, संजय शुक्ला, मनकामना शुक्ला एवं राजकुमार जालान सहित अनेक साहित्यकार, बुद्धिजीवी और संस्कृति-प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन भोला नाथ मिश्र ने किया।