आदर्श लोककला समिति, गोहरी, प्रयागराज द्वारा आयोजित पंचम रामलीला महोत्सव में आज दिनांक 02 अक्टूबर को सांस्कृतिक संस्था इण्डियन फोक एण्ड माडर्न आर्ट अकादमी, प्रयागराज की प्रस्तुति “सीता स्वंवर” प्रसंग रही। आज की प्रस्तुति के निर्देशक थे रमेश कश्यप। सह निर्देशक था शुभम कश्यप व सलोनी कन्नौजिया का। रामलीला महोत्सव 2026 की परिकल्पना व निर्देशन युवा रंगकर्मी कुंवर तेजभानु सिंह “प्रिंस” ने किया। आज की प्रस्तुति का मुख्य आकर्षण मानस की चैपाइयों पर आधारित पारंपरिक रामलीला की राधेश्यामी शैली पर आधारित प्रस्तुतियां रही। जिसमें अभिनेता अपने संवादों को स्वर-लयबद्ध करके गाते हैं।
पारम्परिक राधेश्यामी धुन हमारे दशहरा मेलों की जान रही है। इन धुनों पर आधारित गाने दशहरा मेलों में खूब बजते थे। आधुनिकता के कारण रामलीलाओं का स्वरुप समय के साथ बदलता गया। इसमें पारम्परिक धुनों के स्थान पर पहले से रिकार्डेड संवाद बजने लगे, जिस पर अभिनेता केवल अपनी भाव-भंगिमाओं को ही मंच पर प्रस्तुत करते हैं। राधेश्यामी रामलीला की परम्परिकता में जो लोक जनमानस की मिठास छुपी थी। इस रामलीला महोत्सव में इसी परम्परा को मंचीय आधुनिकता का समावेश करते हुआ पुनः जागृत करने का प्रयास किया गया।
आज की प्रस्तुति में मुख्या अतिथि के रूप में वैश्णव आश्रम दारागंज प्रयागराज के श्री 108 श्री स्वामी राघव प्रपन्ना चर्या जी महाराज उपस्थित थे।
मंच पर जिन कालाकारों ने अभिनय किया उनमें- कुंवर करन सिंह (राम), देवेन्द्र सिंह (लक्ष्मण), जाहनवी पाण्डेय(सीता), मोती चन्द पाण्डेय (राजा जनक), ओम प्रकाश सिंह (परशुराम), दूधनाथ विष्वकर्मा (माली), मिथिलेश यादव (रावण), हर्ष पाण्डेय (विश्वामित्र), शिवानी दुबे (अहिल्या), अनाया सिंह राजपूत (गौरी माँ), रवि कुमार पटेल (वरासुर), इंद्रा जीत सिंह, जीतेन्द्र सिंह, शिवराज, समर्थ जायसवाल, रत्नांक कुमार सिंह, अस्मिता तिवारी, नैन्सी यादव, अपराजिता तिवारी, राज लक्ष्मी, रोहिणी राज, सुरभि सिंह राठौर, सृजल पांडेय, पुनीत पटवा आदि।
वहीँ मंच परे शरद राज (गायन व हारमोनियम), रामराज पटेल (ढोलक), मनु मिश्रा (की बोर्ड), आशुतोष मिश्रा (तबला), रिया दिवाकर (मंच संचालन), मोहम्मद हामिद अंसारी (रूप सज्जा)] फोटोग्राफी और विडियोग्राफी अमित विश्वकर्मा, शकुंतला (वस्त्र विन्यास), हिमांशु शर्मा व राहुल गौतम (सेट एवं प्रॉपर्टी)।