यह कहने में कोई विरोधाभास नहीं है कि हरित पटाखे एक नुकसानदेह हरित है। जैसे-जैसे दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर सर्दियों के एक और मौसम की ओर बढ़ रहे हैं, उन्हें एक ऐसे दुश्मन की वापसी के लिए तैयार होना होगा जिसे कभी ढीला छोड़ दिया जाता है, तो कभी कार्स दिया जाता है। ताजातरीन आदेश ने जन- भावना का हवाला देते हुए आतिशबाजी पर पूर्ण रोक लगाने से मना किया है, और निर्दिष्ट तरह के अगली पीढ़ी के लड़ी पटाखे को अनुमति दी है।
दिल्ली के वायु गुणवत्ता संकट के लिए पटाखे असल गुनहगार नहीं है निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहन, पुआल जलाना और ठहरी ठंडी हवा सब मिलकर सर्दियों के प्रदूषण में योगदान देते हैं। लेकिन जब यह हवा को पहले ही गंभीर स्तर तक धकेल चुके होते हैं तो पटाखे प्रदूषण का स्तर एकाएक बहुत ज्यादा बढ़ा सकते हैं। साल 2025 में जो कोर्ट द्वारा हरित पटाखों के सीमित इस्तेमाल की अनुमति देने के बाद पहली दिवाली थी । दिल्ली का दीपावली बाद पीएम 2.5 औसत 488 ग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया यानी साल 2021 के बाद सबसे ज्यादा जबकि किसी एक घंटे में यह 675 ग्राम प्रति घन मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान सीएस आईआरनीरी जिसने इन्हें बढ़ावा दिया का कहना है कि उनकी नई पीढ़ी पीएम10 में 45-60 फ़ीसदी की कटौती का वादा करती है। हालांकि यह आंकड़े असली दुनिया की दशाओं को प्रतिबिंबित नहीं करते। जब तक आतिशबाजी निर्माण का काम औपचारिक क्षेत्र में नहीं जाता, नियमों को सचमुच अमल में नहीं लाया जाता और पटाखों के शोर शराबे के शौकीनों के बीच इससे लोक स्वास्थ्य को छती के बारे में जागरूकता नहीं फैलती तब तक वायु और ध्वनि प्रदूषण बना रहेगा।